एक्सक्लूसिव
झालावाड़ में बड़ा हादसा: सरकारी स्कूल की छत गिरी, 7 बच्चों की मौत, 29 घायल
झालावाड़, राजस्थान, 26 जुलाई 2025
13 मासूमों की हालत गंभीर, समय पर नहीं पहुँची एम्बुलेंस, 5 शिक्षक सस्पेंड
राजस्थान के झालावाड़ ज़िले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। पिपलिया गांव स्थित एक सरकारी स्कूल की छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसमें 7 बच्चों की मौत हो गई, और 29 घायल हो गए। 13 बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्कूल भवन की हालत पहले से जर्जर थी, लेकिन प्रशासन ने कोई मरम्मत कार्य नहीं करवाया। हादसे के वक्त स्कूल के 5 शिक्षक ड्यूटी पर नहीं थे, जिन्हें बाद में निलंबित कर दिया गया है।
हादसे की प्रमुख बातें एक नजर में:
- हादसा सुबह करीब 9 बजे हुआ, जब बच्चे प्रार्थना के बाद क्लास में पहुँचे थे।
- स्कूल की एक पूरी छत अचानक गिर गई, जिससे करीब 36 बच्चे मलबे में दब गए।
- 7 बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, 29 घायल हैं।
- 13 बच्चों की हालत गंभीर, कुछ को कोटा और जयपुर रेफर किया गया है।
- 5 शिक्षक सस्पेंड – नाम: कमल, कुंदन, दुर्गेश, अनुज, विशाल।
- स्थानीय लोगों और परिजनों ने खुद राहत और बचाव कार्य किया, प्रशासन और एम्बुलेंस देर से पहुँची।
- बाल अधिकार आयोग और मुख्यमंत्री कार्यालय ने जाँच के आदेश दिए।
ग्रामीणों और परिजनों का दर्द:
ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल की दीवारों और छतों में पहले से दरारें थीं, जिनकी जानकारी बार-बार अधिकारियों को दी गई, लेकिन मरम्मत नहीं कराई गई।
“हमारे बच्चों को यूँ मलबे में दबकर मरना पड़ा क्योंकि अधिकारियों ने अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाई। यह हादसा नहीं, हत्या है।” – एक अभिभावक का बयान
मदद नहीं पहुँची समय पर:
- घटना के करीब एक घंटे तक कोई एम्बुलेंस या अधिकारी नहीं पहुँचा।
- घायल बच्चों को परिजनों और ग्रामीणों ने खुद अपनी गाड़ियों से अस्पताल पहुँचाया।
- यदि राहत और बचाव समय पर होता, तो शायद कुछ बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
स्कूल की हालत पहले से थी खराब:
- स्कूल भवन में मरम्मत की कोई प्रक्रिया नहीं चल रही थी।
- बारिश के कारण छत और कमजोर हो चुकी थी।
- जिस ब्लॉक में हादसा हुआ, वह 20 साल से अधिक पुराना था।
- भवन को कभी “जर्जर” घोषित नहीं किया गया, न ही रिपोर्ट में इसका ज़िक्र था।
शिक्षक सस्पेंड, प्रशासन पर सवाल
शिक्षा विभाग ने घटना के बाद कार्रवाई करते हुए पांच शिक्षकों को निलंबित कर दिया।
उन्हीं पर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, लेकिन घटना के समय सभी शिक्षक स्कूल से बाहर थे।
विधायक और प्रशासन की प्रतिक्रिया:
घटना स्थल का दौरा करने पहुंचे स्थानीय विधायक ने इसे “प्रशासनिक हत्या” बताया और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
राज्य सरकार ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतक बच्चों के परिवारों को 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
निष्कर्ष:
यह हादसा सिर्फ दीवार या छत गिरने का नहीं, बल्कि सिस्टम के गिरने का प्रतीक है। जब तक प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाएगी, ऐसे हादसे होते रहेंगे। यह घटना एक सतर्क करने वाली चेतावनी है कि शिक्षा और संरचना दोनों की गंभीर उपेक्षा कितनी भारी पड़ सकती है।
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