दिल्ली
भारत वित्तीय सत्र: पहले बजट से लेकर आज तक का सफर; क्या 2026 के बजट में होगा बड़ा उलटफेर?
भारत में 79वें बजट सत्र की शुरुआत हो चुकी है। बजट का इतिहास, शब्द की उत्पत्ति, निर्मला सीतारमण का 9वां बजट और 2026 के बजट से जुड़ी संभावनाओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट।
New Delhi: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ ही देश में स्वतंत्र भारत का 79वां बजट सत्र औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को आम बजट पेश करेंगी। इससे पहले 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण सदन में रखा गया, जिसमें देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और विकास के संकेतकों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। यह बजट सत्र दो चरणों में आयोजित होगा, जो 28 फरवरी से 2 अप्रैल तक चलेगा।
क्या होता है बजट?
साधारण शब्दों में कहें तो बजट किसी भी व्यक्ति या संस्था की आय और व्यय का संतुलित ब्योरा होता है। इसी के आधार पर यह तय किया जाता है कि कमाई और खर्च के बीच तालमेल कैसे बैठाया जाए। जब देश का बजट पेश किया जाता है, तो वित्त मंत्री राष्ट्रपति के नेतृत्व में पूरे वित्तीय वर्ष का हिसाब-किताब संसद के सामने रखते हैं। साथ ही, आने वाले वर्ष की नीतियां, नियम और आर्थिक प्राथमिकताएं भी तय की जाती हैं।
बजट शब्द का इतिहास
‘बजट’ शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच भाषा के शब्द ‘बोजेत’ से मानी जाती है। इतिहास के अनुसार, इंग्लैंड में शुरुआती दौर में वित्त मंत्री आर्थिक दस्तावेजों को चमड़े के बैग में भरकर संसद पहुंचते थे। जब वह बैग खोला जाता था, तो मजाकिया तौर पर कहा जाता था कि ‘बजट खुल गया’। धीरे-धीरे यही शब्द आर्थिक लेखा-जोखा प्रस्तुत करने के लिए प्रचलन में आ गया।
भारत में भी 2019 तक बजट चमड़े के बैग में पेश किया जाता था, लेकिन इसके बाद वित्तीय विवरण बही-खाते के रूप में प्रस्तुत होने लगा। डिजिटल युग में अब बजट पूरी तरह डिजिटल टैबलेट के माध्यम से पेश किया जाता है।
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भारत में बजट की शुरुआत
भारत में बजट की परंपरा ब्रिटिश शासनकाल से शुरू हुई थी। देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को अंग्रेजी अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था। आज़ाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री आर. के. शनमुखम चेट्टी द्वारा प्रस्तुत किया गया। तब से अब तक पूर्ण और अंतरिम बजट मिलाकर 100 से अधिक बजट पेश किए जा चुके हैं।
निर्मला सीतारमण का 9वां बजट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने कार्यकाल का लगातार 9वां बजट पेश करने जा रही हैं। वह देश की इकलौती वित्त मंत्री हैं, जिन्होंने अब तक लगातार 8 बजट प्रस्तुत किए हैं। उनसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने लगातार 6 बजट पेश किए थे, जबकि सबसे अधिक 10 बजट पेश करने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम दर्ज है। एक सशक्त अर्थशास्त्री के रूप में निर्मला सीतारमण की नीतियों की कई बार सराहना हो चुकी है।
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दो चरणों में चलेगा बजट सत्र
79वें बजट सत्र का पहला चरण 28 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ, जो 8 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। दोनों चरणों में आर्थिक मुद्दों, विधेयकों और नीतिगत फैसलों पर चर्चा की जाएगी।
पिछले साल के बजट की प्रमुख बातें
पिछला बजट मध्यम वर्ग, किसानों और बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। 2025-26 के बजट में 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर कर छूट दी गई, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिली। किसानों के लिए आसान ऋण सुविधाओं की घोषणा की गई।
युवाओं को रोजगार के अवसर देने के लिए 500 कंपनियों में 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप देने की योजना लाई गई, जिसमें 5,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किए गए। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 11.11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया।
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2026 के बजट से क्या हैं उम्मीदें?
इस साल के बजट से भी जनता को कई उम्मीदें हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि आयकर छूट की सीमा 12 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये सालाना की जा सकती है। बीमा प्रीमियम पर छूट को नई टैक्स रिजीम में शामिल करने की संभावना भी जताई जा रही है।
इसके साथ ही, बुनियादी ढांचे के लिए बजट बढ़ाने, किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा बढ़ाने और कुछ जरूरी वस्तुओं को सस्ता करने पर भी नजरें टिकी हैं। कैंसर की दवाएं, इलेक्ट्रिक वाहन और मोबाइल पार्ट्स सस्ते हो सकते हैं, हालांकि फिलहाल ये केवल अनुमान हैं। असल तस्वीर तो बजट पेश होने के बाद ही साफ होगी।
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