उत्तर प्रदेश
वाराणसी में दिल दहला देने वाली घटना: पारिवारिक कलह में पिता ने दो मासूमों के साथ गंगा में लगाई छलांग, बच्चे लापता
वाराणसी, उत्तर प्रदेश | सोमवार, 4 अगस्त 2025
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। पारिवारिक विवाद के चलते चिरईगांव थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव निवासी दुर्गा सोनकर (30) ने अपने दो मासूम बेटों के साथ गंगा नदी में छलांग लगा दी।
🔴 घटना का पूरा विवरण :
घटना सोमवार दोपहर लगभग 12 बजे की है। चिरईगांव थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव निवासी दुर्गा सोनकर (30) सोमवार को अपने दो बेटों संदीप (7) और आशीष (5) को लेकर रिंग रोड स्थित भवनपुरा पुल पर पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे उसने अचानक दोनों बेटों को साथ लेकर गंगा नदी में छलांग लगा दी। मौके पर मौजूद कुछ राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत घटना की सूचना पुलिस और परिजनों को दी। दुर्भाग्यवश, मौके पर पहुंचने में एनडीआरएफ की टीम को करीब दो घंटे लग गए।
करीब दो घंटे तक एनडीआरएफ की टीम नहीं पहुंची, लेकिन इसी बीच दोपहर करीब 1:50 बजे दुर्गा सोनकर को मुस्तफाबाद रेता के पास गंगा में बहते हुए देखा गया। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें बाहर निकाला और तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल दुर्गा की हालत स्थिर बताई जा रही है।
हालांकि, दुर्गा सोनकर के दोनों बच्चे अब भी लापता हैं। उनकी तलाश के लिए स्थानीय गोताखोरों की मदद ली जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर भी राहत कार्य जारी है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिल सकी है।
ग्रामीणों की तत्परता से बची एक जान:
करीब 1:50 बजे दुर्गा सोनकर को मुस्तफाबाद रेता के पास गंगा की धार में बहते देखा गया। गांववालों ने जान की बाजी लगाकर उसे नदी से बाहर निकाला और नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया। उसकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
लेकिन उसके दोनों बच्चे अब भी लापता हैं। प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा रेस्क्यू ऑपरेशन अब तक असफल रहा है। गोताखोरों की टीम के साथ-साथ एनडीआरएफ और पुलिस बल मौके पर लगातार सर्च अभियान चला रहे हैं।
⚠️ प्रशासन पर उठे सवाल:
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने एनडीआरएफ की देरी और पुल की सुरक्षा में भारी खामी को लेकर नाराजगी जताई है। भवनपुरा पुल पर न तो कोई रेलगार्ड, न सुरक्षा कैमरे और न ही सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, जिससे इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया:
घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व सांसद रामकिशुन यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और प्रशासन से गंगा घाटों व पुलों पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग की।उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए प्रशासन से गंगा किनारे सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने की मांग की ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
“इस तरह की घटनाएं बेहद दुखद हैं। प्रशासन को सुरक्षा के इंतजामों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए ताकि भविष्य में कोई और मासूम इस तरह गंगा में न समा जाए।”
— रामकिशुन यादव, पूर्व सांसद
स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ पर सवाल
इस घटना ने एनडीआरएफ की तत्परता और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो घंटे तक राहत टीम का न पहुंचना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
स्थानीय लोग बोले – ‘पुल पर नहीं है कोई सुरक्षा इंतजाम’
📍 स्थानीय निवासियों की मांगें:
- भवनपुरा पुल पर रेलिंग और बैरिकेडिंग लगाई जाए।
- सीसीटीवी कैमरे व निगरानी टीम की तैनाती हो।
- गंगा किनारे सुरक्षा चौकियां बनाई जाएं।
- आपदा के समय रेस्क्यू टीम को तेजी से सक्रिय किया जाए।
चांदपुर गांव के कई ग्रामीणों ने बताया कि भवनपुरा पुल पर किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। न तो रेलिंग है, न निगरानी कैमरे, जिससे हादसे को रोका जा सके।

निष्कर्ष:
यह घटना सिर्फ एक परिवार का नहीं, समाज की जिम्मेदारी का भी आईना है। प्रशासन, समाज और परिवार — सभी को आत्ममंथन करने की जरूरत है कि कैसे ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
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