गोरखपुर शहर
उरुवा बाजार में साप्ताहिक बंदी को लेकर व्यापार मंडल दो भागों में बंटा, असमंजस में व्यापारी
गोरखपुर के उरुवा बाजार में साप्ताहिक बंदी के दिन को लेकर व्यापारी दो गुटों में बंट गए हैं। एक पक्ष रविवार तो दूसरा बृहस्पतिवार को बंदी की मांग कर रहा है।
उरुवा बाजार (गोरखपुर): नगर पंचायत उरुवा में साप्ताहिक बंदी के दिन को तय करने को लेकर व्यापार मंडल के बीच का विवाद अब सड़कों पर आ गया है। बाजार को किस दिन बंद रखा जाए, इस मुद्दे पर व्यापारी दो गुटों में बंट गए हैं, जिससे स्थानीय आम व्यवसायियों के बीच भारी असमंजस और परेशानी की स्थिति पैदा हो गई है। आज दोनों ही पक्षों के लोग अपनी-अपनी मांगों के समर्थन में बैनर-पोस्टर लेकर सड़क पर उतर आए। एक पक्ष का नेतृत्व कर रहे गुट का पुरजोर आग्रह है कि उरुवा बाजार की साप्ताहिक बंदी रविवार को होनी चाहिए। इस गुट के सदस्य दुकान-दुकान जाकर व्यापारियों से रविवार को प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील कर रहे हैं और इसके समर्थन में पोस्टर भी लहरा रहे हैं। रविवार गुट के पदाधिकारियों का दावा है कि उन्होंने इस विवाद के समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीका अपनाया। उन्होंने बताया कि बाजार में दो अलग-अलग रजिस्टर ले जाकर दुकानदारों की राय ली गई—
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एक रविवार के समर्थन के लिए और दूसरा बृहस्पतिवार के लिए। इस सर्वे में दुकानदारों से उनके नाम, मोबाइल नंबर और हस्ताक्षर कराए गए। दावे के मुताबिक, कुल 205 दुकानदारों ने रविवार को बाजार बंद रखने के पक्ष में अपना समर्थन दिया, जबकि मात्र 30 दुकानदारों ने बृहस्पतिवार का विकल्प चुना। इस भारी बहुमत को आधार बनाकर रविवार गुट बाजार को इसी दिन बंद कराने पर अड़ा है।
रविवार के समर्थन में राहुल द्विवेदी, सूरज त्रिपाठी, पवन शर्मा, संतोष ठठेर, शफदर अली, अज़मल शेख़, जितेन्द्र प्रताप गौड़, कमलेश यादव, दीपक सिंह, इकबाल अहमद, अजय जायसवाल, सुजीत सिंह, विनोद यादव, मौर्य वस्त्रालय, हरेन्द्र गुप्ता, विकास जायसवाल, आलोक पाण्डेय, निहाल अग्रहरि, सूरज मोदनवाल, मनोज गुप्ता, संतोष जायसवाल, अभिषेक गुप्ता, राहुल सैनी, अखिलेश जायसवाल, अशोक गुप्ता, अजय जायसवाल, प्रभुदयाल जैसवाल, राजेश स्वर्णकार, यशवन्त मौर्य, शिवानंद मौर्य, कुमार पुस्तक इत्यादि शामिल रहे |
दूसरी तरफ, व्यापार मंडल का दूसरा गुट इस फैसले से पूरी तरह असहमत है और बाजार को बृहस्पतिवार (गुरुवार) को बंद रखने की मांग कर रहा है। उनका तर्क है कि परंपरागत या व्यावहारिक रूप से बृहस्पतिवार का दिन ही बंदी के लिए उपयुक्त है। दोनों पक्षों के बीच चल रहे इस गतिरोध और सड़क पर जारी खींचतान से सामान्य छोटे और मझोले व्यापारी बेहद परेशान हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वे किस गुट के निर्णय का पालन करें और किस दिन अपनी दुकानें खुली रखें या बंद करें। व्यापारियों ने आपसी सहमति से इस मामले में हस्तक्षेप कर जल्द से जल्द कोई सर्वसम्मत निर्णय से निर्णय लेकर कम करने की बात की है, ताकि बाजार में शांति और सुचारू व्यवस्था बनी रहे।
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