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इतिहास के झरोखों से

आइए जानते है कब से शुरुआत हुआ था मजदूर दिवस मानने की प्रक्रिया….

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पूर्वांचल भारत न्यूज़

बात उस जब की है जब पूरी दुनिया में मजदूरों को कोई अधिकार नहीं था न काम करने का कोई निश्चित समय और न ही कोई भविष्य की कोई सुरक्षा, लोग कारखानों में काम तो करते थे लेकिन उनका शोषण होता था, कंपनियों के मालिक उनसे काम नहीं लेते थे बल्कि मजदूरों का खून चूसते थे। यहां तक कि काम करते करते बहुत से मजदूरों कि मौत हो जाती थी, काम के वक्त काफी चोटे भी लगती थी, लेकिन उसका जिम्मेदार कोई नहीं होता था। तब वह समय आता है।

1 मई 1986 में अमेरिका के सभी मजदूर संघ साथ मिलकर ये निश्चय करते है कि वे 8 घंटो से ज्यादा काम नहीं करेंगें, जिसके लिए वे हड़ताल कर लेते है. इस दौरान श्रमिक वर्ग से 10-16 घंटे काम करवाया जाता था, साथ ही उनकी सुरक्षा का भी ध्यान नहीं रखा जाता था. उस समय काम के दौरान मजदूर को कई चोटें भी आती थी, कई लोगों की तो मौत हो जाया करती थी. काम के दौरान बच्चे, महिलाएं व् पुरुष की मौत का अनुपात बढ़ता ही जा रहा था, जिस वजह से ये जरुरी हो गया था, कि सभी लोग अपने अधिकारों के हनन को रोकने के लिए सामने आयें और एक आवाज में विरोध प्रदर्शन करने लगे।

इस हड़ताल के दौरान 4 मई को शिकागो के हेमार्केट में अचानक किसी आदमी के द्वारा बम ब्लास्ट कर दिया जाता है, जिसके बाद वहां मौजूद पुलिस अंधाधुंध गोली चलाने लगती है. जिससे बहुत से मजदूर व् आम आदमी की मौत हो जाती है. इसके साथ ही 100 से ज्यादा लोग घायल हो जाते है. इस विरोध का अमेरिका में तुरंत परिणाम नहीं मिला, लेकिन कर्मचारियों व् समाजसेवियों की मदद के फलस्वरूप कुछ समय बाद भारत व अन्य देशों में 8 घंटे वाली काम की पद्धति को अपनाया जाने लगा. तब से श्रमिक दिवस को पुरे विश्व में बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाने लगा, इस दिन मजदूर वर्ग तरह तरह की रेलियां निकालते व् प्रदर्शन करते है.

#भारत में मजदूरों की दिशा और दशा

हम बात करे मजदूरों की तो भारत मजदूरों कि हालात में काफी सुधार आया है, इसके लिए सरकार भी आगे आयी, और उन्होंने मजदूरों के लिए मजदूर कानून का गठन किया, और काम का निश्चित समय निर्धारित किया भविष्य कि सुरक्षा की गारंटी भी दी। जो भी भविष्य निधि बनाया, जिससे कोई भी कंपनी का मालिक मजदूरों का शोषण ना कर सके। लेकिन कोरोना काल में सरकारों ने मजदूरों को जिस हालत में छोड़ा वह देखने लायक नहीं था लोग हजारों किलोमीटर पैदल ही अपने घर को निकाल पड़े,बाद में सरकार ने उनको मुफ्त में राशन, श्रमिक कार्ड के माध्यम से DBT के माध्यम से नगद पैसे भेजे जिससे उनके हालात में सुधार हो।

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पूर्वांचल भारत न्यूज के माध्यम से देश के सभी मजदूरों को हार्दिक शुभकामनाएं और भारत निर्माण में अपना पसीना बहाते है।

#HappyLabourDay2022  #मजदूर_दिवस
#PurvanchalBharatNews #WorldLaboratoryDay #happylabourday

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