गोरखपुर ग्रामीण
लावारिस गाय बिना दाना -पानी के तड़प-तड़प के मरने को मजबूर
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डॉ राकेश शर्मा
गोरखपुर।
वर्तमान सरकार द्वारा गौ संरक्षण को लेकर के तमाम व्यवस्थाएं की जा रही हैं। हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है ।लेकिन मतलबी इंसान अपने निजी स्वार्थ में अंधा हो संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर जाता है। जब तक गाय दूध देती है तब तक वह उसके दूध का लाभ लेता है। दूध न देने एवं वृद्ध हो जाने पर वह गाय उसके लिए बेकार हो जाती है। और उसे तिल तिल कर मरने के लिए ऐसे ही छोड़ देता है। गाय की उक्त स्थित देखकर शासन की गौ संरक्षण की सारी घोषणायें हवा हवाई नजर आती है।ऐसा ही एक मामला गोरखपुर के दक्षिणांचल के धुरियापार क्षेत्र में देखने को मिला।
एक वृद्ध एवं बीमार लावारिस गाय विगत 4 दिनों से एक गेहूं के खेत में खुले आसमान मेंं धूप एवं शीत सहन करते हुए बिना दाना -पानी के एवं चिकित्सा के तड़प तड़प कर मरने को मजबूर है।
ग्रामीणों के अनुसार चार दिन पूर्व रात में कुछ लोग एक बूढ़ी एवं बीमार गाय को लगभग डेढ़ वर्ष के उसके बछड़े के साथ पिकअप से लाकर धुरियापार के राजस्व गांव कस्बा तेली में खेतों से गुजरने वाले चकरोड पर छोड़ कर चले गये। टहलते- टहलते उपरोक्त गाय चकरोड के पूरब तरफ स्थित खेत में गिर गयी। तभी से उपरोक्त गाय खुले आसमान के नीचे बिना दाना पानी के दिन में धूप एवं रात में शीत का प्रकोप सहते हुए तड़प -तड़प कर मृत्यु से संघर्ष कर रही है। उसका बछड़ा भी अपनी मां के पास बिना कुछ खाये पिये खड़ा था। बताया जाता है कि बीती रात कुछ कुछ लोग बछड़े को हांक ले गये। चौथे दिन कुछ जागरूक ग्राम वासियों से यह सूचना मीडिया कर्मियों तक पहुंची। मीडिया कर्मियों के माध्यम से यह सूचना उप जिलाधिकारी गोला तक पहुंची। उप जिलाधिकारी गोला ने मामले को तत्काल संज्ञान में लेकर प्रभारी चिकित्साधिकारी पशु चिकित्सक नंदलाल गुप्ता को गाय की देखभाल कराने का निर्देश दिया। अधिकारी नंदलाल गुप्ता ने पशु चिकित्सक रामसागर को मौके पर भेजा। मौके पर जाकर रामसागर ने गाय को पानी पिलाया और इंजेक्शन लगाया। और गाय की देखभाल के लिए ग्राम प्रधान को सूचित कर दिया। पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि गाय की जब तक सांस चलेगी तब तक उसकी चिकित्सा की जायेगी।
