बनारस
पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट “काशी विश्वनाथ कॉरिडोर” की ये तस्वीरें देख आप कह उठेंगे वाह!

वाराणसी:
काशी के धार्मिक व ऐतिहासिक संदर्भों का जीवंत दस्तावेज लिखने जा रहा काशी विश्वनाथ धाम अब निर्माण के अंतिम पड़ाव पर है। 75 प्रतिशत से अधिक काम हो चुका है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वयं दिसम्बर में लोकार्पण का समय भी नियत कर दिया है। अब धाम के अलौकिक स्वरूप के दर्शन का इंतजार है। धाम के स्वरूप की वह झलक भी दिखने लगी है, जो पीएम के ईंट रखते समय तैयार हुई थी।
मंदिर परिसर व चौक को जोड़ने वाले प्रवेश द्वार का निर्माण पूर्ण हो चुका है। नक्काशी पत्थरों से बने गेट से बाबा दरबार से मां गंगे की ओर कॉरिडोर में आवागमन होगा। इसके आसपास की गैलरी का भी निर्माण हो चुका है।
7541 वर्गमीटर में फैले मंदिर चौक का निर्माण करीब 90 फीसदी हो गया है। मंदिर चौक के आसपास स्थित भवनों का निर्माण हो चुका है। अब केवल पत्थरों की क्लेडिंग और मार्बल लगाने का काम चल रहा है। चौक कॉरिडोर का सबसे बड़ा क्षेत्रफल वाला इलाका है। इसमें एक साथ 10 हजार श्रद्धालु इकट्ठा हो सकते हैं।
बाबा दरबार के आसपास का इलाका मंदिर परिसर के रूप में जाना जाता है। 3052 वर्ग मीटर वाले परिसर में चार द्वार खुल रहे हैं, जिसमें तीन द्वार बन चुके हैं। यहां भी 85 फीसदी से ज्यादा काम हो गया है। श्रद्धालु इसी परिसर में पहुंचकर बाबा का दर्शन-पूजन करेंगे। यह जल्द ही बाबा के भक्तों के लिए तैयार हो जाएगा।

मैदागिन और गोदौलिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गोदौलिया गेट का निर्माण भी लगभग पूरा हो चुका है। चुनार के पत्थरों की डिजाइन से तैयार गेट को वहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति निहारते हुए जाता है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में 24 भवन बनने हैं और सभी का सिविल कंस्ट्रक्शन का काम पूरा हो चुका है। कॉरिडोर का मूल स्वरूप अब दिव्य और भव्य तरीके से नजर आने लगा है। फिनिशिंग का काम निर्धारत समय सीमा से पहले पूरा होने की अधिकारियों को उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 मार्च 2019 को काशी विश्वनाथ धाम का शिलान्यास किया था। धाम के लिए जमीन खरीदने में लगभग 400 करोड़ रुपए और निर्माण कार्य में अब तक लगभग 339 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। 50,200 वर्ग मीटर जमीन में लगभग 14,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में ढाई साल से जारी निर्माण कार्य के बीच कोरोना की पहली और दूसरी लहर में विश्वनाथ धाम का काम भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। इन दिनों 1000 से ज्यादा मजदूर विश्वनाथ धाम के भवनों की फिनिशिंग और अन्य निर्माण कार्य में लगे हुए हैं।
काशी विश्वनाथ धाम को भव्य रूप देने के लिए 7 तरह के विशेष पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें बालेश्वर स्टोन, मकराना मार्बल, कोटा ग्रेनाइट और मैडोना स्टोन का मुख्य रूप से उपयोग किया जा रहा है। इस वजह से काशी विश्वनाथ धाम अलौकिक नजर आएगा। यहां मुख्य रूप से यात्री सुविधा केंद्र, म्यूजियम, स्प्रिचुअल बुक सेंटर, फूड कोर्ट और मुमुक्ष भवन से लेकर हर वो चीज होगी जो श्रद्धालुओं के साथ ही सैलानियों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त होगी।
(तस्वीरे शोसल मीडिया से साभार)
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टॉप न्यूज़
प्रयागराज में बाढ़ का खतरा फिर बढ़ा, गंगा-यमुना ने दोहराया 2013 की स्थिति

प्रयागराज, 8 अगस्त 2025
उत्तर प्रदेश का प्रयागराज जिला एक बार फिर बाढ़ के गंभीर खतरे का सामना कर रहा है। गंगा और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए 2013 की बाढ़ जैसी स्थिति तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर जलस्तर में और वृद्धि हुई, तो 1978 और 2013 जैसी तबाही दोबारा हो सकती है।
🔹 वर्तमान स्थिति:
- गंगा नदी का जलस्तर (फाफामऊ): 86.11 मीटर
- यमुना नदी का जलस्तर (नैनी): 86.12 मीटर
ये आंकड़े 2013 के जलस्तर के बेहद करीब हैं, जब: - गंगा: 86.820 मीटर
- यमुना: 86.600 मीटर
और तब 7 तहसीलों के 233 गांव बुरी तरह प्रभावित हुए थे।
🔹 ऐतिहासिक बाढ़ की जानकारी:
आजादी के बाद की सबसे भीषण बाढ़ प्रयागराज में सितंबर 1978 में आई थी।
- गंगा का जलस्तर: 88.390 मीटर
- यमुना का जलस्तर (नैनी): 87.990 मीटर
- 251 गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए थे।
- यमुना बैंक रोड से शहर में पानी घुस गया था, और बक्शी बांध में रिसाव शुरू हो गया था।
📜 अब तक प्रयागराज में बाढ़ के प्रमुख वर्ष:
वर्ष | विवरण |
---|---|
1948 | पहली बाढ़ आजादी के बाद |
1956 | दूसरी बाढ़ की दस्तक |
1967 | गांवों में व्यापक नुकसान |
1971 | नदियों का जलस्तर बढ़ा |
1978 | सबसे गंभीर बाढ़, 251 गांव प्रभावित |
1983 | पुनः बाढ़ का असर |
2001 | शहरी क्षेत्र में बाढ़ |
2013 | दूसरी सबसे बड़ी बाढ़, 233 गांव प्रभावित |
2016-2022 | हर वर्ष बाढ़ से हल्की से मध्यम तबाही |
🔍 दृश्य और प्रभाव:
गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर के बीच कर्जन ब्रिज, नैनी ओल्ड ब्रिज, और आजाद सेतु बाढ़ के पानी के बीच नजर आ रहे हैं। नदी किनारे बस्तियों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है।
🚨 प्रशासन की तैयारी:
प्रशासन और आपदा राहत दल पूरी तरह सतर्क हैं।
- बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत कैंप खोले गए हैं।
- नावें और रेस्क्यू टीम तैनात की गई हैं।
- निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
👉 निष्कर्ष:
वर्ष 2025 में प्रयागराज एक बार फिर गंभीर बाढ़ की कगार पर है। 2013 की यादें ताजा हो गई हैं, जबकि 1978 का भयावह इतिहास सभी को सतर्क रहने की चेतावनी दे रहा है। प्रशासन और जनता दोनों को मिलकर सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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उत्तर प्रदेश
वाराणसी में दिल दहला देने वाली घटना: पारिवारिक कलह में पिता ने दो मासूमों के साथ गंगा में लगाई छलांग, बच्चे लापता

वाराणसी, उत्तर प्रदेश | सोमवार, 4 अगस्त 2025
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। पारिवारिक विवाद के चलते चिरईगांव थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव निवासी दुर्गा सोनकर (30) ने अपने दो मासूम बेटों के साथ गंगा नदी में छलांग लगा दी।
🔴 घटना का पूरा विवरण :
घटना सोमवार दोपहर लगभग 12 बजे की है। चिरईगांव थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव निवासी दुर्गा सोनकर (30) सोमवार को अपने दो बेटों संदीप (7) और आशीष (5) को लेकर रिंग रोड स्थित भवनपुरा पुल पर पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे उसने अचानक दोनों बेटों को साथ लेकर गंगा नदी में छलांग लगा दी। मौके पर मौजूद कुछ राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत घटना की सूचना पुलिस और परिजनों को दी। दुर्भाग्यवश, मौके पर पहुंचने में एनडीआरएफ की टीम को करीब दो घंटे लग गए।
करीब दो घंटे तक एनडीआरएफ की टीम नहीं पहुंची, लेकिन इसी बीच दोपहर करीब 1:50 बजे दुर्गा सोनकर को मुस्तफाबाद रेता के पास गंगा में बहते हुए देखा गया। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें बाहर निकाला और तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल दुर्गा की हालत स्थिर बताई जा रही है।
हालांकि, दुर्गा सोनकर के दोनों बच्चे अब भी लापता हैं। उनकी तलाश के लिए स्थानीय गोताखोरों की मदद ली जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर भी राहत कार्य जारी है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिल सकी है।
ग्रामीणों की तत्परता से बची एक जान:
करीब 1:50 बजे दुर्गा सोनकर को मुस्तफाबाद रेता के पास गंगा की धार में बहते देखा गया। गांववालों ने जान की बाजी लगाकर उसे नदी से बाहर निकाला और नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया। उसकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
लेकिन उसके दोनों बच्चे अब भी लापता हैं। प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा रेस्क्यू ऑपरेशन अब तक असफल रहा है। गोताखोरों की टीम के साथ-साथ एनडीआरएफ और पुलिस बल मौके पर लगातार सर्च अभियान चला रहे हैं।
⚠️ प्रशासन पर उठे सवाल:
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने एनडीआरएफ की देरी और पुल की सुरक्षा में भारी खामी को लेकर नाराजगी जताई है। भवनपुरा पुल पर न तो कोई रेलगार्ड, न सुरक्षा कैमरे और न ही सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, जिससे इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया:
घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व सांसद रामकिशुन यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और प्रशासन से गंगा घाटों व पुलों पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग की।उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए प्रशासन से गंगा किनारे सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने की मांग की ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
“इस तरह की घटनाएं बेहद दुखद हैं। प्रशासन को सुरक्षा के इंतजामों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए ताकि भविष्य में कोई और मासूम इस तरह गंगा में न समा जाए।”
— रामकिशुन यादव, पूर्व सांसद
स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ पर सवाल
इस घटना ने एनडीआरएफ की तत्परता और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो घंटे तक राहत टीम का न पहुंचना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
स्थानीय लोग बोले – ‘पुल पर नहीं है कोई सुरक्षा इंतजाम’
📍 स्थानीय निवासियों की मांगें:
- भवनपुरा पुल पर रेलिंग और बैरिकेडिंग लगाई जाए।
- सीसीटीवी कैमरे व निगरानी टीम की तैनाती हो।
- गंगा किनारे सुरक्षा चौकियां बनाई जाएं।
- आपदा के समय रेस्क्यू टीम को तेजी से सक्रिय किया जाए।
चांदपुर गांव के कई ग्रामीणों ने बताया कि भवनपुरा पुल पर किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। न तो रेलिंग है, न निगरानी कैमरे, जिससे हादसे को रोका जा सके।

निष्कर्ष:
यह घटना सिर्फ एक परिवार का नहीं, समाज की जिम्मेदारी का भी आईना है। प्रशासन, समाज और परिवार — सभी को आत्ममंथन करने की जरूरत है कि कैसे ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
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उत्तर प्रदेश
पीएम मोदी कल करेंगे अमृत भारत ट्रेनों का शुभारंभ, काशी-रामनगरी सहित उत्तर प्रदेश के कई स्टेशनों से गुजरेगी अमृत भारत ट्रेनें

वाराणसी, उत्तरप्रदेश
18 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल रूप से तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का उद्घाटन करेंगे, जो आध्यात्मिक नगरी काशी, रामनगरी अयोध्या और गोरखपुर सहित उत्तर प्रदेश के कई स्टेशनों से गुजरेंगे।इन ट्रेनों में स्लीपर और जनरल कोच ही उपस्थित होंगे।
यहां के लोगों को मालदा नगर (प. बंगाल) से गोमती नगर (लखनऊ) जाने वाली इस ट्रेन का लाभ मिलेगा। एक ट्रेन पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से जाएगी और दूसरी गोरखपुर से जाएगी।रेलवे इन तीन अमृत भारत सुपरफास्ट ट्रेनों को यूपी के लोगों को देने जा रहा है, जो सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदेभारत एक्सप्रेस के बाद आने वाली हैं।इन ट्रेनों में गैर वातानकूलित (नॉन एसी) स्लीपर और जनरल कोच होंगे।
यह ट्रेन मध्यम और कम आय वर्गों के लोगों के लिए आरामदायक और सुविधापूर्ण सफर सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। इसकी सीटें सामान्य ट्रेनों की तुलना में अधिक आकर्षक और आरामदायक हैं। मेट्रो की तरह, लोग एक डिब्बे से दूसरे में जा सकते हैं। दिव्यांगों की सुविधाओं को खास ध्यान दिया गया है। लगेज रैक या रैक पर कुशन भी लगाए गए थे। पुश-पुल टेक्नोलॉजी (ट्रेन के दोनों तरफ इंजन लगना) अधिकतम गति देगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल 18 जुलाई को बिहार के मोतिहारी में एक जनसभा में दोपहर 12 बजे इन ट्रेनों को रवाना करेंगे। कैंट स्टेशन भी ट्रेन के स्वागत की तैयारी कर रहा है। स्थानीय नागरिक यहां प्लेटफार्म नंबर 6-7 से हरी झंडी दिखाकर उसे आगे रवाना करेंगे। रेलवे इंजीनियरिंग विभाग ने मंच आदि बनाने के लिए नापों की जाँच की। ट्रेन का टाइम टेबल अभी जारी नहीं हुआ है। यह ट्रेन पुश-पुल तकनीक से चलने वाली पहली होगी जिसके दोनों ओर इंजन होंगे।
ट्रेनों का विवरण-
1- मालदा टाउन-गोमतीनगर अमृत भारत
मालदा टाउन से न्यू फरक्का,बरहरवा,साहिबगंज,कहलगांव, भागलपुर,सुल्तानगंज,जमालपुर,अभयपुर,किउल,शेखपुरा, नवादा,तिलिया,गया,डेहरी आनसोन,सासाराम,भभुआ, पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, वाराणसी जंक्शन (कैंट), जौनपुर जंक्शन, गोमती नगर जाएगी।
2- राजेन्द्र नगर-नई दिल्ली अमृत भारत
राजेन्द्र से रवाना होकर पटना,दानापुर,आरा,बक्सर, पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, सूबेदारगंज, गोविंदपुरी, गाजियाबाद होकर नई दिल्ली पहुंचेगी।
3- दरभंगा-गोमतीनगर अमृत भारत
दरभंगा से प्रस्थान कर कमतौल,जनकपुर रोड,सीतामढ़ी, बैरागनिया,घोरासाहन,रक्सौल,सिकटा,नरकटियागंज, हरिनगर,बगहा,कप्तानगंज,गोरखपुर,बस्ती,मनकापुर, अयोध्या धाम,अयोध्या कैंट होकर गोमती नगर पहुंचेगी।
टॉप न्यूज़
राशनकार्ड धारकों के लिए यूपी में अब नया नियम हुआ जारी, प्रत्येक यूनिट सदस्यों को लगाना होगा अंगूठा

लखनऊ, उत्तर प्रदेश
यूपी में आपूर्ति विभाग ने राशन कार्डों के यूनिटों के सत्यापन का नया तरीका अपनाया है। विभाग ने यूनिटों की ई-केवाईसी कराने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत कार्ड के प्रत्येक यूनिट को एक बार ई-पास मशीन में अंगूठा लगाना पड़ेगा। इसका समय विभाग की ओर से निर्धारित किया जाएगा। राशन कार्ड धारकों का कोई भी एक यूनिट ई-पाश मशीन में अंगूठा लगाकर राशन प्राप्त कर सकता है।
यूपी में अब राशन कार्ड धारकों का कोई भी एक यूनिट ई-पाश मशीन में अंगूठा लगाकर राशन प्राप्त कर सकता है। पिछले कई वर्षों से यह व्यवस्था चल रही है। ऐसे में जिस व्यक्ति का निधन भी हो गया है, उसका भी खाद्यान्न उठ रहा है। जबकि इसकी सूचना दी जानी चाहिए, जिससे कार्ड से ऐसे यूनिट को हटाया जा सके।
आपूर्ति विभाग ने लिया ई-केवाईसी कराने का निर्णय
यूपी में आपूर्ति विभाग ने इस तरह के यूनिट को राशन कार्ड से हटाने के लिए ई-केवाईसी कराने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था फरवरी माह से शुरू हो जाएगी। इसमें सभी यूनिटों को क्रम वार अलग-अलग महीनों में ई-पाश मशीन में अंगूठा लगाने का मौका दिया जाएगा। इस व्यवस्था से ऐसे यूनिट का पता चल जाएगा, जिनका निधन हो चुका है।
इसे लेकर आपूर्ति विभाग प्लानिंग कर रहा है।विभाग यूनिटों की सुविधा के मुताबिक समय निर्धारित करना चाहता है, जिससे गैर जनपद व गैर राज्यों में काम करने गए लोगों को भी असुविधा न हो।बढ़ती जा रहे नए कार्ड बनवाने के आवेदन
पात्र गृहस्थी और अंत्योदय योजना वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक संचालित हो रही है। उस समय जिले की आबादी 44 लाख के करीब थी। अब आबादी बढ़कर लगभग 53 लाख हो गई। परिवारों की भी संख्या बढ़ गई है। उधर, सत्यापन न होने के चलते रिक्त स्थान कम ही बन पाया है। फिलहाल जिले का लक्ष्य पूरा चल रहा है। नए कार्ड नहीं बन पा रहे हैं,जिससे अन्य नए गरीब परिवारों का राशन कार्ड बनने में हो रही है समस्या।
मौसम
यूपी में बन रहा हवा का दबाव क्षेत्र, 17 और 18 सितंबर को कहीं भारी, कहीं ज्यादा भारी बारिश का अलर्ट
यूपी में भादो में सावन का कसर पूरा होने की उम्मीद दिख रही है। पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर कभी हल्की तो कभी भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग.

यूपी में भादो में सावन का कसर पूरा होने की उम्मीद दिख रही है। पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर कभी हल्की तो कभी भारी बारिश हो रही है। इस बीच मौसम विभाग ने 17 और 18 सितंबर को उत्तर प्रदेश में भारी और कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले 15 व 16 सितम्बर को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की से सामान्य बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कम हवा का एक दबाव क्षेत्र दक्षिणी उत्तर प्रदेश पर बन रहा है।
पिछले 24 घंटों के दरम्यान प्रदेश में सबसे अधिक 12 सेंटीमीटर बारिश देवरिया में रिकार्ड की गई। इसके अलावा बाराबंकी के रामनगर में 11, अयोध्या, चित्रकूट के कर्वी में नौ-नौ, देवरिया के सलेमपुर, जालौन के कालपी में छह-छह, हमीरपुर, झांसी के चिल्लाघाट, झांसी के थरौली, बिजनौर के नगीना, हमीरपुर के शहजीना, बस्ती, बारांकी के हैदरगढ़, रायबरेली के डलमऊ, कौशाम्बी के मंझनपुर, गोण्डा के तरबगंज में पांच-पांच, गोरखपुर के मुखलिसपुर, अमेठी के मुसाफिरखाना, संतकबीरनगर के घनघटा, गोण्डा के मनकापुर में चार-चार सेण्टीमीटर बारिश दर्ज की गई।
इन जिलों में बारिश की संभावना-
बांदा, चित्रकुट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत कबीर नगर, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, कनौज, कानपुर शहर, कानपुर देहात, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर मैनपुरी, इटावा, झांसी, औरैया, जालौन, हमीरपुर, महोबा और ललीतपुर है।
फसलों के लिए फायदेमंद;
कृषि विभाग के अवकाश प्राप्त उप निदेशक डॉ..सी.पी.श्रीवास्तव के अनुसार प्रदेश में अब हो रही यह बारिश धान व खरीफ की अन्य फसलों के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इस वक्त धान की फसल में फूल आने लगे हैं और बालियां बनेंगी।
इसके अलावा दलहन व तिलहन की फसलों को भी यह बारिश फायदा देगी। विभाग के संयुक्त निदेशक आर.के.सिंह ने किसानों को सलाह दी कि इस बारिश का पानी खेत से निकलने न दें, खरपतवार पर पूरा ध्यान दें और जहां खेत खाली हों वहां तरोई की बोवाई करें।
अयोध्या
पूर्वांचल में आज सुबह हल्की बारिश से किसानों के चेहरों पर आई हल्की मुस्कान

पूर्वांचल भारत न्यूज़
काफी दिनों से बारिश न होने के कारण सूखा की मार झेल रहा पूर्वांचल के तमाम जिला तो लोग मायूस होने लगे थे फसल बरबाद होने के कगार पर था लेकिन कहीं कहीं देखा जा रहा था कि इन्द्र देवता को खुश करने के लिए तरह तरह के पुराने टोटके अपना रहे थे, कहीं मेंढ़क मेढकी की शादी,कहीं विधायक के ऊपर पानी और कचरा से नहलाया का रहा था, तो कहीं जमीन पर मेघ की रिझाने के लिए काच कचौती खेला जा रहा था, लेकिन आज सुबह जब हल्की बारिश हुई तो किसानों के चेहरे पर हल्की मुस्कान देखने को मिला।
आजमगढ़
पीसीएस प्री परीक्षा-2022 का रिजल्ट घोषित

पूर्वांचल भारत न्यूज़
यूपी लोक सेवा आयोग से बड़ी खबर
पीसीएस प्री परीक्षा-2022 का रिजल्ट घोषित।
प्रारंभिक परीक्षा में 5964 अभ्यर्थी सफल घोषित।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए 602974 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे।
जबकि प्रारंभिक परीक्षा में 329310 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए।
मुख्य परीक्षा का कार्यक्रम बाद में किया जाएगा जारी।
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