उत्तर प्रदेश
गोरखपुर की बेटी अंशिका यादव ने हॉन्गकॉन्ग में रचा इतिहास, कुश्ती में जीता गोल्ड मेडल
यस.एन. मिश्रा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
गोरखपुर के खजनी क्षेत्र के छोटे से गांव जमौली बुजुर्ग की 17 वर्षीय अंशिका यादव ने दुनिया को दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
अंशिका ने हॉन्गकॉन्ग चाइना इंटरनेशनल रेसलिंग प्रतियोगिता 2025 में 73 किलो ग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर भारत और गोरखपुर का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया।

🎯 मेहनत और लगन से मिली जीत
अंशिका की यह सफलता अचानक नहीं आई, इसके पीछे है उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और नियमित अभ्यास।
उन्होंने स्वर्गीय श्री ज्ञान सिंह व्यायामशाला में अपने कोच श्याम पाल के मार्गदर्शन में कुश्ती सीखी।
गोरखपुर कुश्ती संघ के अध्यक्ष दिनेश सिंह का भी उन्हें हमेशा सहयोग मिला।
इस प्रतियोगिता में JWS बेंगलुरु की तरफ से भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंशिका ने कई अनुभवी अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को हराया।
उनके सटीक दांव और आत्मविश्वास के सामने बड़े-बड़े खिलाड़ी टिक नहीं पाए।
🏡 गांव से ग्लोबल मंच तक
गांव की मिट्टी से निकलकर हॉन्गकॉन्ग जैसे वैश्विक मंच तक पहुंचना अंशिका की दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है।
आज गोरखपुर से लेकर दिल्ली तक हर जगह लोग उन्हें “गोरखपुर की शेरनी” कहकर सम्मान दे रहे हैं।
गांव में जश्न का माहौल है और हर कोई इस बेटी की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।
🔮 अगला लक्ष्य: एशियन गेम्स और ओलंपिक
अंशिका यहीं नहीं रुकना चाहतीं। उनका अगला लक्ष्य है एशियन गेम्स और ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना।
उनके कोच श्याम पाल का कहना है,
“अंशिका में जुनून और ताकत दोनों हैं। वह आने वाले वर्षों में भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।”
💡 प्रेरणा बनी अंशिका
अंशिका की यह कहानी उन हर लड़की के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों या गांवों में रहकर भी बड़े सपने देखती हैं।
उन्होंने यह साबित कर दिया कि
“अगर मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।”
📌 निष्कर्ष: गोरखपुर की बेटी अंशिका यादव ने यह दिखा दिया कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं। उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि हर देशवासी के लिए गर्व की बात है।
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