आस्था
मनसा देवी मंदिर में भगदड़: करंट की अफवाह से मची अफरातफरी, 6 श्रद्धालुओं की मौत, 36 घायल
हरिद्वार, 27 जुलाई 2025
सावन और रविवार के संयोग पर भारी भीड़ उमड़ी हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में, जहाँ भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की जान चली गई और 36 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसे की वजह मंदिर परिसर में “करंट फैलने की अफवाह” बताई जा रही है, जिसे स्थानीय प्रशासन और चश्मदीदों ने गलत बताया है।
हादसे के वक्त क्या हुआ ?
सुबह के समय मंदिर के सीढ़ी मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ बेहद ज्यादा थी। इसी दौरान बिजली के पोल से चिंगारी निकली, जिससे लोगों में यह अफवाह फैल गई कि करंट आ गया है। अफरा-तफरी में लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे, जिससे भगदड़ मच गई।
चश्मदीदों का बयान दिया है जिसमे स्थानीय दुकानदार अवधेश ने बताया कि करंट की कोई घटना नहीं हुई, बल्कि एक बुजुर्ग महिला के गिरने के बाद भगदड़ शुरू हुई। प्रशासन ने आने-जाने का मार्ग एक ही रखा था, जिससे रास्ता पूरी तरह भर गया और पैदल चलने तक की जगह नहीं थी।
क्या प्रशासन की चूक है ?
भीड़ नियंत्रण में विफलता सामने आई है। सावन और रविवार को भीड़ की संभावना के बावजूद भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। कांवड़ यात्रा के समय अपनाया गया एक-तरफा आवागमन इस बार लागू नहीं किया गया।

Image Source : PTI, मनसा देवी मंदिर में भगदड़
मुख्यमंत्री का दौरा व मुआवजा:
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हरिद्वार पहुंचे। उन्होंने घायलों से मुलाकात कर स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा की और मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए।
सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹ 2 लाख और घायलों को ₹50,000 की सहायता राशि देने की घोषणा की है। साथ ही, पीड़ितों को उनके गृह नगर तक पहुंचाने की व्यवस्था भी सरकार करेगी।
अखिलेश यादव ने इस घटना के बारे कहा है कि
“हरिद्वार में मनसा देवी मंदिर में हुई भगदड़ में श्रद्धालुओं की मौत का मामला बेहद हृदयविदारक है और चिंतनीय भी।”
“भाजपा सरकार में महाकुंभ से लेकर रथयात्रा हो या अन्य कोई आयोजन सब जगह ऐसी घटनाओं का दोहराव ये बताता है कि भाजपा प्रचार तो वैश्विक स्तर का करती है लेकिन प्रबंधन स्थानीय स्तर का भी नहीं करती, इसीलिए आम श्रद्धालुओं को अपना जीवन गंवाना पड़ता है। इस मामले की भी गहन जाँच हो और श्रद्धालुओं की मृत्यु का कारण और सही आँकड़ा बताया जाए।”
निष्कर्ष: मनसा देवी मंदिर की यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना भीड़ नियंत्रण की विफलता और अफवाहों के दुष्प्रभाव की चेतावनी है। सरकार द्वारा राहत कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन इससे भविष्य के लिए भीड़ प्रबंधन की ठोस रणनीति की आवश्यकता स्पष्ट हो गई है।
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