गोरखपुर शहर
Gorakhpur: डीएम दीपक मीणा का औचक निरीक्षण, लापरवाही पर अफसरों को सख्त चेतावनी
गोरखपुर में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने विकास कार्यों और सामाजिक संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। निर्माण कार्यों में सुस्ती और अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
Gorakhpur: जनपद में संचालित विकास परियोजनाओं और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी संस्थाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए जिलाधिकारी दीपक मीणा एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने जिले के विभिन्न स्थानों का दौरा कर निर्माणाधीन परियोजनाओं और शैक्षणिक-सामाजिक संस्थानों का स्थलीय निरीक्षण किया और कार्यों की प्रगति का बारीकी से आकलन किया।
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निरीक्षण की शुरुआत कोनी स्थित निर्माणाधीन महिला पीएसी बटालियन के आवासीय भवनों और पुलिस ट्रेनिंग स्कूल से हुई। डीएम ने निर्माण की गुणवत्ता, डिजाइन और प्रगति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार और तय समयसीमा में पूरे किए जाएं। वॉटर लॉगिंग की समस्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने और अतिरिक्त मैनपावर लगाकर कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
कार्यदायी संस्था को लगाई कड़ी फटकार
इसके बाद जिलाधिकारी तालनदोर पहुंचे, जहां उन्होंने निर्माणाधीन वेटरनरी कॉलेज की प्रगति की समीक्षा की। कार्य की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए डीएम ने कार्यदायी संस्था को फटकार लगाई और कहा कि यह परियोजना शिक्षा और रोजगार से जुड़ी है, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
इसी क्रम में तालनदोर में बन रहे अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भी निरीक्षण किया गया। मिट्टी भराई के कार्य में सुस्ती पर असंतोष जताते हुए डीएम ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बनाकर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।
निरीक्षण का सिलसिला आगे बढ़ते हुए कान्हा गौशाला एवं बृहद गौ संरक्षण केंद्र तक पहुंचा। यहां जिलाधिकारी ने शीघ्र संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं निर्माणाधीन एकीकृत आयुष चिकित्सालय में कार्यों की धीमी प्रगति देख डीएम का रुख सख्त हो गया। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं हुआ तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय है।
इसके पश्चात जिलाधिकारी ने स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालिका इंटर कॉलेज का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रावास, भोजन, पेयजल, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। छात्राओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए।
मूक-बधिर बालकों की व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष जोर
मूक-बधिर बालकों के राजकीय विद्यालय में सांकेतिक भाषा आधारित शिक्षा, आवासीय व्यवस्था और सहायक उपकरणों की समीक्षा करते हुए डीएम ने कौशल और व्यावसायिक शिक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र में अव्यवस्था और गंदगी पाए जाने पर जिलाधिकारी ने अधीक्षक को कड़ी फटकार लगाई। वहीं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे दृष्टिबाधित छात्रों के छात्रावास और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई और व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने स्पष्ट कहा कि वंचित और विशेष आवश्यकता वाले वर्गों से जुड़ी संस्थाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विकास कार्यों और जनकल्याण से संबंधित सभी योजनाओं में गुणवत्ता और समयबद्धता प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

