उत्तर प्रदेश
करोना काल मे चिकित्सकों की कमी अब लगी है खलने,धरती के भगवान की देश मे ये हैं हालात
करोना काल मे चिकित्सकों की कमी अब लगी है खलने,धरती के भगवान की देश मे ये हैं हालात
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!गोरखपुर।
देश में करोना संक्रमण की स्थिति भयावह होती जा रही है।हालात यह हैं कि देश को आबादी के हिसाब से जितने चिकित्सकों की जरूरत है वह ऊँट के मुंह मे जीरा के समान है।देश में डाक्टरों का
भीषण संकट है। आज हम आपको बताएंगे कि चिकित्सको की कमी से देश के हालात क्या हैं और केंद्र व प्रदेश सरकर इस मामले में अभी तक क्या निर्णय लिया है।
2021 के करोना महामारी में अभी तक 10 हजार से
ज्यादा डाक्टर कोरोना संक्रमित हो चुके
हैं। और करीब 900 डाक्टरों की मौत
हो चुकी है, कई डॉक्टर अवकाश पर हैं। अब इस कमी को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने निजी एवं फैमिली डाक्टरों का सहारा लिया है।
इतना ही नहीं स्वास्थ्य मंत्रालय के उस फैसले का भी विरोध हो रहा है जिसमें मेडिकल छात्रों से कोरोना मरीजों का उपचार कराने का फैसला लिया
गया है। देश भर के डॉक्टरों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के माध्यम से यह
भी मांग की है कि संकट की इस घड़ी में होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक एवं भारतीय
चिकित्सा पद्धति के डॉक्टरों की भी सेवाएं ली जाएं। इस मांग के पीछे तर्क दिया गया है कि जब सरकार ने दूसरी
पद्धतियों के डॉक्टरों को अंग्रेजी पद्धति के डॉक्टरों के बराबर का दर्जा, वेतन एवं सुविधाएं दी है तो अब उन्हें महामारी
के समय मुख्यधारा में क्यों नहीं जोड़ा जा रहा है।
हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि मेडिकल छात्रों द्वारा उपचार करना पूरी तरह से असंवैधानिक होगा।
एक अनुमान के मुताबिक देश में लगभग चार लाख डॉक्टरों, 20 लाख नर्सों एवं सात लाख बेड की कमी है। चिकित्सा से जुड़ी इस मानव क्षमता के लिए आवश्यक संसाधन जैसे वेंटिलेटर, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर व वार्ड भी नहीं है। सन 2017 के रिकॉर्ड के मुताबिक एमसीआई में
कुल 10 लाख 41 हजार डॉक्टर पंजीकृत है जिसमें 1.20 लाख
सरकारी सेवा में है।
अब सवाल यह उठता है कि देश के लोगों की जान बचाने के लिए क्या मेडिकल छात्रों को मानव सेवा का अवसर दिया जाएगा।क्या होमियोपैथी व आयुर्वेद के चिकित्सकों को मेडिकल की मुख्य धारा से जोड़कर इस महामारी में उन्हें सम्मान मिल पायेगा?हालांकि देश को अभी करोना की इस महामारी में अधिक से अधिक चिकित्सको व सुविधाओ की आवश्यकता है।
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