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गोरखपुर विश्वविद्यालय में पेड़ों की कटाई पर विवाद, छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप

गोरखपुर विश्वविद्यालय में 8 महीने में 3000 पेड़ काटे जाने के आरोप, छात्रों ने पारदर्शिता की मांग की।

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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में बीते कुछ महीनों से लगातार हो रही पेड़ों की कटाई को लेकर छात्रों और छात्र संगठनों में नाराजगी तेज होती जा रही है। विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न हिस्सों और विभागों के आसपास बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने के आरोप सामने आए हैं, जिससे कैंपस की हरियाली पर असर पड़ने की बात कही जा रही है।

छात्रों का दावा है कि पिछले करीब आठ महीनों में 3000 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। इस मामले में उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कटाई से जुड़े सभी आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन पारदर्शिता नहीं दिखाता है, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

विकास कार्यों के नाम पर कटाई का आरोप
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में विकास कार्यों के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई की जा रही है। उनका आरोप है कि कई ऐसे पेड़ भी काटे गए, जो पूरी तरह हरे-भरे और सुरक्षित थे।

कला संकाय के छात्र आदित्य राज तिवारी ने बताया कि पिछले आठ महीनों से लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में विभागों के पीछे स्थित पेड़ों को हटाया गया, लेकिन अब सामने के पेड़ भी काटे जा रहे हैं, जिससे मामला सबके सामने आ गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिला वन विभाग से 1195 पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी थी, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है। उनके अनुसार, छात्रों को इस संबंध में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।

डील को लेकर भी उठे सवाल
कॉमर्स विभाग के छात्र आलेख सूर्यवंशी ने भी इस मुद्दे पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कुलपति का कार्यकाल समाप्ति की ओर है और इसी समय विकास कार्यों में तेजी आई है।

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आलेख सूर्यवंशी ने आरोप लगाया कि पेड़ों की कटाई के लिए करीब एक करोड़ 28 लाख रुपए की डील की गई है, जिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

छात्र नेताओं ने जताई नाराजगी
छात्र नेता सतीश प्रजापति ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, वहीं विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो इसे बड़े आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

स्वस्थ पेड़ों की कटाई का भी आरोप
छात्र धीरेन्द्र सिंह का कहना है कि प्रशासन की ओर से पुराने या दीमक लगे पेड़ों को हटाने की बात कही जा रही है, लेकिन वास्तविकता अलग है। उन्होंने दावा किया कि कई स्वस्थ और छोटे पेड़ों को भी काट दिया गया है।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान पर सवाल
बीए के छात्र उज्जवल यादव ने भी प्रशासन से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि कैंपस के बाहर ‘एक पेड़ मां के नाम’ का बोर्ड लगा है, लेकिन दूसरी ओर हजारों पेड़ों की कटाई हो रही है, जो विरोधाभासी स्थिति है।

फिलहाल इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि यदि जल्द ही पेड़ों की कटाई से जुड़े रिकॉर्ड और अनुमति संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए, तो आंदोलन को तेज किया जाएगा।

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