उत्तर प्रदेश
पीपीगंज के कोल्हुआ गांव में गैस वितरण पर उठे सवाल, उपभोक्ताओं ने लगाया कम गैस और ज्यादा वसूली का आरोप
पीपीगंज के कोल्हुआ गांव में घरेलू गैस वितरण को लेकर उपभोक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि कम गैस वाले सिलेंडर देकर अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं, जबकि प्रशासन ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
गोरखपुर जिले के पीपीगंज नगर क्षेत्र स्थित कोल्हुआ गांव में घरेलू गैस सिलेंडर वितरण को लेकर उपभोक्ताओं ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि गैस एजेंसियों से जुड़े हाकर होम डिलीवरी के दौरान निर्धारित कीमत से अधिक रुपये वसूल रहे हैं। इसके साथ ही सिलेंडरों से गैस निकालकर कम वजन वाले सिलेंडर उपभोक्ताओं को दिए जाने की शिकायत भी सामने आई है। मामले को लेकर गांव के लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और प्रशासन से तत्काल जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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जानकारी के मुताबिक, पीपीगंज स्थित आषीश इंडेन गैस सर्विस को करीब तीन महीने पहले गैस वितरण में अनियमितताओं के आरोप में प्रशासन ने सील कर दिया था। इसके बाद एजेंसी से जुड़े लगभग 40 हजार उपभोक्ताओं को छह अलग-अलग गैस एजेंसियों में स्थानांतरित किया गया। इनमें मनीराम इंडेन सर्विस, गायत्री इंडेन गैस सर्विस काजीपुर, जय शिव इंडेन गैस सर्विस चरगांवां, मां बामंत इंडेन गैस सर्विस बालापार, गोरखपुर इंडेन गैस सर्विस और कृपा इंडेन गैस सर्विस फरेन्दा महाराजगंज शामिल हैं।
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वर्तमान समय में कोल्हुआ गांव में मुख्य रूप से मां बामंत इंडेन गैस सर्विस बालापार और गायत्री इंडेन गैस सर्विस काजीपुर के माध्यम से गैस की होम डिलीवरी की जा रही है। हालांकि उपभोक्ताओं का आरोप है कि वितरण व्यवस्था पूरी तरह मनमाने तरीके से संचालित हो रही है।
स्थानीय निवासी राजेंद्र प्रसाद, दीपक कुमार, राजेश कुमार सिंह, दीपेश यादव और अभयनंदन सहित कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि बुकिंग कराने और डीएसी नंबर मिलने के बावजूद समय से गैस उपलब्ध नहीं कराई जाती। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार हाकर घर के अंदर से सिलेंडर निकालकर देते हैं और कुछ सिलेंडर पहले से खुले हुए होते हैं। उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि अवैध तरीके से सिलेंडरों से करीब दो किलो गैस निकाल ली जाती है और बाद में वही सिलेंडर ग्राहकों को सौंप दिए जाते हैं।
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ग्रामीणों के मुताबिक घरेलू गैस सिलेंडर की तय कीमत करीब 975 रुपये है, लेकिन उनसे 1000 से 1050 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। आरोप है कि अतिरिक्त रकम देने से इनकार करने वाले उपभोक्ताओं को या तो देर से सिलेंडर दिया जाता है या फिर गैस उपलब्ध ही नहीं कराई जाती। कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी दावा किया कि हाकर खुले तौर पर अधिक पैसे देने पर समय से गैस उपलब्ध कराने की बात कहते हैं।
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मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने अवैध बिक्री के आरोप भी लगाए हैं। लोगों का कहना है कि कई ऐसे लोगों को भी सिलेंडर दिए जा रहे हैं जिनके पास डीएसी नंबर या वैध बुकिंग नहीं होती। आरोप है कि ऐसे सिलेंडरों के बदले 2500 से 3000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जबकि नियमित उपभोक्ताओं को नियमों का हवाला देकर परेशान किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस वितरण के दौरान मौके पर सिलेंडरों का वजन कराया जाए और संबंधित एजेंसियों व हाकरों के रिकॉर्ड की जांच की जाए। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो गैस वितरण में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और कालाबाजारी का खुलासा हो सकता है।
उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि होम डिलीवरी व्यवस्था का फायदा उठाकर ग्रामीण और गरीब उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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इस मामले में जिला आपूर्ति अधिकारी गोरखपुर अरुण सिंह ने कहा कि यदि निर्धारित मूल्य से अधिक रुपये वसूले जा रहे हैं या कम गैस वाले सिलेंडर दिए जा रहे हैं तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि शिकायतों की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं कैम्पियरगंज के आपूर्ति निरीक्षक संजीत कुमार ने भी आरोपों को गंभीर बताते हुए जांच का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित एजेंसी और हाकरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि पहले एक गैस एजेंसी पर कार्रवाई होने के बावजूद क्षेत्र की गैस वितरण व्यवस्था फिर से सवालों के घेरे में कैसे आ गई। फिलहाल उपभोक्ताओं की निगाहें प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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